Part -1 ''पहली मुलाकात"
अगस्त का महीना और बारिश की बूंदे, उसपर उसके गिटार की आवाज़ .......कुछ यूँ इस संडे की शुरुआत हुई थी। आंखे खुली तो गिटार की धुन कानो से सीधे दिल में जाने लगी...उठकर देखा तो पता चला सामने वाली खिड़की में एक नया चेहरा रहने आया है- 'कबीर'... कबीर नाम था उसका...
वो पीठ करके बैठा था तो उसे देख नही पायी...मेरी रूममेट के बॉयफ्रेंड का नया रूममेट था वह।
मेरी अब नींद उसके गिटार की आवाज़ और सा रे गा मा के रियाज़ से खुलती थी बिना देखे ही उसे कुछ ही दिन में मुझे उसकी आवाज़ से प्यार हो गया था बहुत बार देखना भी चाहा पर कभी ठीक से देख पाऊं ऐसा मौका नही मिला।।
में लिखा करती थी ,कविता...सोचती थी कि अगर उसकी आवाज़ में मेरे शब्द हो तो कैसा हो...
एक दिन उठी ही थी कि तभी संगीत की आवाज़ रुकी और मेरी रूममेट की आवाज़ सुनाई दी-" हेलो, कबीर", रिया मेरी रूममेट ने उसे आवाज़ दी और बदले में हेलो भी आया... उठ न काव्या , उसे झट से मुझे उठाया ...और मुझे खिड़की पर ले आयी और ज़ोर से चिल्लाई ,कबीर ये है मेरी जान काव्या । बताया था न...
एक तो आप किसी को अनजाने ही पसंद करो और आपको वो बिना धुले मुँह और बिखरे बालों के साथ देखे वो भी खिड़की खिड़की .... ये क्या किया रिया तूने, में मन ही मन बोला..... खैर कबीर ने मुझे हेलो और गुड मॉर्निंग कहा और मैंने वही अपने बालों को संभालते हुए वापस से दोहराया.... कुछ इस तरह उसने मुझे और मैंने उसे देखा।। उसकी आवाज़ से ज्यादा खूबसूरत मुझे उसकी आंखें लगी......।।
वो पीठ करके बैठा था तो उसे देख नही पायी...मेरी रूममेट के बॉयफ्रेंड का नया रूममेट था वह।
मेरी अब नींद उसके गिटार की आवाज़ और सा रे गा मा के रियाज़ से खुलती थी बिना देखे ही उसे कुछ ही दिन में मुझे उसकी आवाज़ से प्यार हो गया था बहुत बार देखना भी चाहा पर कभी ठीक से देख पाऊं ऐसा मौका नही मिला।।
में लिखा करती थी ,कविता...सोचती थी कि अगर उसकी आवाज़ में मेरे शब्द हो तो कैसा हो...
एक दिन उठी ही थी कि तभी संगीत की आवाज़ रुकी और मेरी रूममेट की आवाज़ सुनाई दी-" हेलो, कबीर", रिया मेरी रूममेट ने उसे आवाज़ दी और बदले में हेलो भी आया... उठ न काव्या , उसे झट से मुझे उठाया ...और मुझे खिड़की पर ले आयी और ज़ोर से चिल्लाई ,कबीर ये है मेरी जान काव्या । बताया था न...
एक तो आप किसी को अनजाने ही पसंद करो और आपको वो बिना धुले मुँह और बिखरे बालों के साथ देखे वो भी खिड़की खिड़की .... ये क्या किया रिया तूने, में मन ही मन बोला..... खैर कबीर ने मुझे हेलो और गुड मॉर्निंग कहा और मैंने वही अपने बालों को संभालते हुए वापस से दोहराया.... कुछ इस तरह उसने मुझे और मैंने उसे देखा।। उसकी आवाज़ से ज्यादा खूबसूरत मुझे उसकी आंखें लगी......।।


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