Part-3
"नही, ये वाली लाइन प्ले में रखेंगे, नही ये वाली"
कुछ इस तरह से मेरी और कबीर की बहस हो रही थी। साथ साथ काम करते करते 15 दिन हो गए थे और सिर्फ 15 दिनों में हम दोनों एक दूसरे के बहुत अच्छे दोस्त बन गए थे, इतने अच्छे कि एक दूसरे पर हक़ जताने लग गए थे।
हम दोनों मिलते थे, बातें करते थे और अब तो हम दोनों घूमने भी लगे थे साथ साथ। मुझे उसके साथ वक़्त बिताना पसंद था और शायद ये इसलिए भी था क्योंकि मैं उसे पसंद करती थी ।
"तुम न मुझे सबसे अच्छे से समझती हो, तुम मेरी सबसे अच्छी दोस्त हो"- एक दिन बिना कहे कबीर की उदासी जान लेने पर कबीर ने मुझे ये ओहदा दिया।
धीरे धीरे हमारी दोस्ती और गहरी हो रही थी या फिर ये कह की कबीर के लिए हमारी दोस्ती और मेरे लिए हमारा प्यार। रात रात भर बाते करना, साथ साथ में घूमना, ये सब करते करते कब 2 महीने बीत गए पता ही नही चला।
कभी कभी मैं कबीर से ये भी पूछा करती थी कि क्या उसकी जिंदगी में कोई लड़की है और इस बात को कबीर बहुत खूबसूरती से ये कहकर टाल दिया करता था -"कोई होती तो दिखती नही क्या"??
इस बीच कबीर का प्ले भी हो गया था और वो बहुत अच्छा भी रहा।
एक दिन मैं ,रिया, अभय औऱ कबीर साथ में खाना खा रहे थे तभी कबीर के पास किसी का फ़ोन आया और उसने काट दिया उसके बाद फिर फ़ोन आया और उसने फ़ोन बंद कर दिया। उस फ़ोन के आने के बाद कबीर उदास सा हो गया।
जब हम जाने लगे तो मैंने कबीर से पूछा कि जबसे फ़ोन आया है वो उदास है आखिर किसका फ़ोन है?
"एक ऐसी लडक़ी का जिससे मैने बहुत प्यार किया और शायद आज भी करता हूँ,इससे ज्यादा मैं शायद कुछ और न बोल पाऊँ।"-कबीर ने कहा और इतना कहकर चला गया।
उस दिन मैं पूरी रात सो नही पायी क्योकि प्यार की खूबसूरती दिख रही थी पर आज तकलीफ का अहसास हो रहा था। आप जिसे चाहे अगर वो किसी और को चाहे तो शायद ही इससे ज्यादा बेबसी की कोई और हालत होती होंगी।
अगले दिन रिया ने भी वही बात छेड़ दी, 'तू जानती है काव्या, कबीर एक लड़की से बहुत करता है आज से 1 साल पहले वो उसे छोड़कर किसी को साथ चली गयी थी और अब वो वापस आना चाहती है"
"तो क्या कबीर यही चाहता है??"-मैंने किसी तरह अपनी भावनाओं को छिपाते हुए पूछा।
"हां, क्यो नही ? जब आप किसी से प्यार करते है तो आप उसे माफ कर ही देते है। वो भी कर देगा।"-रिया ने कहा।
अगले दिन सुबह मैंने कबीर को कॉल किया तो उसके फ़ोन बिजी जा रहा था। बाद में उसने बताया कि उसकी पुरानी गर्लफ्रैंड 'भाविका' का फ़ोन था।
आने वाले एक हफ्ते तक मेरे फ़ोन का वेटिंग में होने का सिलसिला रहा तो मैंने उससे बात करनी कम करदी।
वो अगर कॉल करता तो मैं कोई बहाना बनाकर फोन रख दिया करती।
एक दिन पता चला वो लड़की उससे मिलने आयी है।
उस रात मैं बहुत रोई, इतना ही रिया को भी पता चल गया। उसने बहुत पूछा तो मैंने बताया कि कॉलेज में मैं किसी को पसंद करती हूं और को किसी और को।
भाविका से मिलने के बाद से कबीर ने भी मुझसे बात करना , मिलना लगभग खत्म कर दिया था।
अक्सर रिया मुझसे मेरे कॉलेज के प्यार के बारे पूछा करती और मैं कहती अब सब ठीक है वो और मैं साथ है अब....तम्हे जल्दी ही उससे मिलवा भी दूंगी।
1 महीने बाद कबीर का मुझे मेसेज आया ,"काव्या, तुमसे बहुत कुछ कहना था पर कह नही पाया,
पता नही हमारी दोस्ती कैसे खत्म सी हो गयी।
कल मैं वापस अपने शहर जा रहा हूँ। रुकना तो चाहता हूं पर वजह नही है, उम्मीद करता हूँ तुम स्टेशन मुझसे मिलने जरूर आओगी।
अपना ख्याल रखना।"
- कबीर
मैंने सोचा- "चाहे जो हो जाये मैं नही जाऊंगी इससे मिलने। एक लड़की के आ जाने से मुझे भूला दिया। हुह!!!!"


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