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Tuesday, 2 January 2018

"💝कबीर की काव्या💝"- part 4

                              Part -4
जिस दिन कबीर जाने वाला था, उस रात मैं बहुत रोई इतना कि मेरी आंखें सूजी हुए थी।
अगली सुबह जब मैं उठी तो रिया तो ये समझते देर न लगी कि मैं रात भर रोई हूँ। सुबह उठकर भी मैं कबीर की यादों में खोई हुई थी।
"तू क्यों है ऐसे लड़के के साथ जो तुझे रोने के बहाने देता है"-रिया ने कहा।
"मतलब ???"-रिया के अचानक सवाल ने मुझे कबीर की यादों से बाहर निकाल दिया।
"रोई , नही तो" -मेरे इस झूठ में मेरे हाथ भी साथ नही दे रहे थे।
"तू जानती है आज कबीर वापस जा रहा है??,तुझसे मिलना चाह रहा है तू चल रही ह न?"-रिया के अचानक एक औऱ दिल दुखाने वाले सवाल ने मेरी आँखों को नम कर दिया।
"काव्या तू रो क्यो रही है?
मुझे लगा तुझे उसके जाने से ज्यादा फर्क नही पड़ता,
कबीर बताता था तू उससे बात नही करना चाहती पर यार आज तो वो जा रहा है आज तो तू चल सकती है"- रिया की इस बात के बाद मैं खुद को रोक नही पायी और फ़ूट-फूट कर रोने लगी।
"देख, अब तू रो मत, तुम दोनो का समझ नही आता न तो वो कुछ पूछने देता है और अब तू क्यो रो रही है"-"मैं उसे जाते हुए नही देख सकती रिया"- रिया के सवाल पर ये मेरा जवाब था।
"पर क्यों...??"-रिया ने पूछा
"क्योकि मैं उससे प्यार करती हूं"-मैने रोते हुए जवाब दिया।
"पर तू तो कॉलेज में किसी से.....?"-रिया ने पलट कर फिर पूछा।
"नही वो सब झूठ था"-मेरा जवाब सुनकर रिया ज़ोर ज़ोर से हँसने लगी।
"तुम दोनों ही पागल हो,दोनो प्यार करते हो और दोनों की छिपाते हो, और वो पागल तुमसे दूर जा रहा है क्योंकि तुम्हें किसी और के साथ नही देख सकता।"-रिया ने हँसते हुए कहा।
"पर वो तो किसी और से प्यार करता है ना, वो तो मेरी कॉल का भी जवाब नही देता था"-मैंने अपनी आँखें दो इंच और बड़ी करके पूछा।
"अरे नही , वो उसकी पुरानी गर्लफ्रैंड यानी भाविका इसे परेशान कर रही थी जब इसने भाविका को ये कहा कि अब तुम उसकी जिंदगी हो तो पहले तो काफी कोशिश की उसके करीब आने की। बाद में वो थक कर चली गयी।"
उस वक़्त तुम उससे दूर हो रही होगी, और तभी अभय से कबीर को ये पता चला कि तुम्हारी ज़िन्दगी में कोई और है तो कबीर ने यहां से जाने का फैसला किया ।"-रिया ने बात पूरी की।
"तो तुमने मुझे पहले क्यों नही बताया"-मैंने गुस्से से रिया ने बोला।
"मैडम हमे भी कल ही पता चला है,तुम दोनों कहाँ कुछ बताते हो,अब जाओ और उससे बताओ सब"-रिया ने कहा ।
मैं और रिया तभी कबीर के रूम पर गए।
जैसे कि दरवाजा खुला तो सामने कबीर था।
"कहाँ जा रहे हो"-मैंने कबीर से पूछा।
"वापस जा रहा हूँ"-कबीर ने मायूस होकर जवाब दिया।
"अच्छा, और मैं कैसे रहूंगी ये सोचा एक बार भी?"-कबीर मेरी ये बात सुनकर दंग रह गया।
"देख क्या रहे हो, प्यार करती हूं तुमसे...अभी भी जाना है तो बताओ"- मेरी एक के बाद बात सुनकर कबीर को समझ नही आया कि क्या बोले।
"एक बार कह नही सकते थे प्यार करता हूँ"-मैंने फिर कहा।
" लो जी अब कह देता हूँ , प्यार करता हूँ तुमसे"-कबीर के ये बोलने के बाद हम दोनों ने एक दूसरे को देखा और देखते ही रह गए।
तभी रिया और अभय की उहू उहू ने हमे एक दूसरे की आँखों से बाहर निकाला।
"चलो कबीर चलते है अब , अब देर मत करो पहले ही बहुत देर हो गयी है"-अभय ने कहा।
"कहाँ....????" -मैंने और कबीर ने एक साथ कहा।
"प्यार का जश्न मानने और कहाँ?, तुमसे कहीं औऱ जाना था क्या?"- अभय की ये बात सुनकर हम चारो है दिए और कबीर और उसकी काव्या चल दिये प्रेम ग्रंथ लिखने।।।
     -:  The end:-

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